Monday, March 27, 2006

छत्तीसगढ़ी बोलना कैसे सीखें (तीसरा दिन)

छत्तीसगढ़ी बोलना कैसे सीखें ?

तीसरा दिन
(क्रमशः)

हिन्दी - छत्तीसगढ़ी

वर्तमान काल के कुछ वाक्यः

क्या तुम छत्तीसगढ़ी जानते हो – का तैं छत्तीसगढ़ी जानथस (समझथस )
मैं रायपुर में रहता हूँ - मैं हा रायपुर मा रहिथौं
नहीं, मैं गाँव में रहता हूँ - नइ ,मैं हा गाँव मा रहिथौं
तुम्हारा क्या नाम है - तोर का नाँव हे /आय
मेरा नाम दादू है - मोर नाँव दादू हे
आपके पिताजी का क्या नाम है - तुँहर ददा (सियान) के का नाँव है (हे)
तुम्हारी माँ का क्या नाम है - तोर दाई (महतारी) के का नाँव है
मैं बाज़ार जाती हूँ - मैं हा बजार (हाट) जाथौं,
मेरे पिताजी किसान हैं - मोर ददा किसान है
तुम मंत्री जी को पत्र लिखते हो - तैं मंत्री जी ला चिट्ठी लिखथस
क्या तुम ने खा लिया - का तैं खा डारे
अभी मुझ को जाना है - अभी मोला जाए बर है
तुम सुबह से क्या कर रहे हो – तैं बिहिनया ले का करत हस
मैं किताब पढ़ रहा हूँ - मैं किताब पढ़त हंव
हम आफ़िस जा रहे हैं - हमन आफ़िस जात हन
बच्चे पार्क जा रहे हैं - लइकामन बगीचा जात हैं
औरतें सब्जी खरीद रही हैं - माई लोगन मन साग बिसावत है (लेवत हैं)


भूतकालः-


मैंने नहीं, मेरे भाई ने लिखा - मैं नइ, मोर भाई लिखे है
मैंने नहीं किया - मैं नइ करें हंव
हम बाजार गए थे - हमन बजार गै रहेन
मेरी बहन गा रही थी - मोर बहिनी गावत रहिस
वह अखबार पढ़ रहा था - ओहा अखबार पढ़त रहिस
मैं आँफ़िस नहीं गया था - मैं आफ़िस नइ गै (या गय) रहें
वे बाजार गए थे - ओमन बजार गै रहिन
बच्चे मेला देखने गए थे - लइकामन मेला देखन गे रहिन
मैं दो साल रायपुर मैं था - मैं दू बछर रायपु म रहें
वह वहाँ गई थी - ओ उहाँ गै रहिस
दुकान बंद है - दुकान बंद है
मैंने कल केला खरीदा था - मैं काली केरा बिसाए रहें
मेरा काम ख़त्म हो गया था - मोर काम सिरा (खतम) गै रहिस
वे खा चुके थे - ओमन खा डारे रहिन
वह फ़िल्म देखने गया था - ओ फ़िलिम देखे बर गै रहिस

भविष्यकालः-

हाँ, मैं आऊँगा - हौ, मैं आहौं
मैं घर पर प्रतीक्षा करूँगा - मैं घर मा अगोरिहौं
राम रायपुर जाएगा - राम रायपुर जाही
मैं कल बिलासपुर पहुँचूंगा - मैं काली बिलासपुर हबरिहौं
वह पहुँच गई होगी - ओहा हबर गै होही
कल परीक्षा दूँगा - काली परीछ्छा देहौं
हम सो रहे होंगे - हमन सुतत रहे होबो
आँफ़िस जाने की तैयारी कर रहा होगा -आफ़िस जाए बर तियार होत होही
तुम बाजार जाओगे - तैं बजार जाबे
कल स्कूल की छुट्टी रहेगी - काली स्कूल के छुट्टी रइही
कल मुख्यमंत्री का प्रोग्राम है - काली मुख्यमंत्री के पोरोगराम हावे
शाम को मीटिंग होगी - संझा बइठका होही
10बजे सब इकट्ठा होंगे -10 बजे सब्बो झन जुरियाहीं

आज्ञा और प्रार्थना के वाक्यः-

सामने देखो - आगू देखौ
आगे बढ़ो - आगू बढ़ौ
गाड़ी धीरे चलाओ - गाड़ी धीरे चलावव
अपना काम करो - अपन बूता करौ
वापस आओ - लहुँटौ
अपना ख्याल रखो - अपन फिकर करौ
सुनिए तो - सुनौ तो
जल्दी आना - झटकुन आबे
तैयार रहना – तियार रहिबे
सोच समझ को बोल - देख –सुन के बोल / सोंच बिचार के बोल
एक तरफ़ हो जाओ - एके डाहर (कोती या अंग)हो जाबौ
बाएँ चलो - डेरी रेंगौ
मज़ाक मत करो - ठट्ठा झन करौं
जाने दो - जान दव
आने दो -आन दव
बैठ जाओ – बइठ जावौ
ज़रा रुक - थोकन रुक (ठहर या र )
सबको बिठाओ - सबो ल बइठावौ
आपकी मर्जी - तुँहर मन
मेरी सहायता करें - मोर मदद करौ
जैसी आपकी मर्जी - जइसन तुँहर मन (मरजी)
ज़रा फिर कोशिश करो - थोरकन फेर जोर लगावौ
उत्तर दीजिए - जवाब देवौ
बैठिए - बइठौ
आइए - आवौ
पागल मत बनो - बइहा झिन बनौ (झन बइहावौ)
मेरे पीछे आओ - मोर पाछू आवौ
जगह खाली करो , जगह दो - ठौर दौ, घुँच जावौ
अपने काम सेकाम रखो - अपन काम ले काम रखौ
यह पैकेट कूरियर से भेज दो - ए पाकिट ला कुरियर मा पठो दौ
इसे फ़ैक्स कर दो - ए ला फेक्स कर दौ
बाज़ार से गोभी लाना - बजार ले गोभी लानबे
समय पर आया - टेम म आयें
साहब को सूचना दो - साहब ला खबर करादौ
खा-पी के आना - ले खा- पी के आवे
चाय ले आओ - चहा लानौ
ज़रा हाथ लगाना - थोरकन हाथ लगा

प्रश्नवाचक वाक्यः (हाँ नाँ उत्तरापेक्षी-‘क्या’)

क्या तुम अँग्रेजी बोल सकते हो ? – का तैं अँग्रेजी गोठिया लेथस
क्या वह झूठ बोलती है ? – का ओ लबारी मारथे
क्या आप सच सच बोल रहे हैं ? – का तूँ (तुमन) सच गोठियात हौ
क्या हम जाएँ ? - का हमन जान (जायीं)
क्या आप बाजार जाएँगे ? – तुमन बजार जाहौ का
क्या तुम जानते पहचानते हो ? – तुमन चिनथौ का
क्या आप नाराज है ? – तुमन नराज हौ का / रिसाए हौ का
क्या आपको घर जाना है ? – तुमन ला घर जाए बर है का
क्या टमाटर ताजे हैं ? – टमाटर ताजा है का
क्या दूध वाला आ गया ? – पहटिया आ गै का
क्या वह आपको जानती है ? – वो तुमन ला जानथै का
क्या उसे बुलाऊँ ? – का ओला बलावंव
क्या आप कृपा करेंगे ? – का तूँ तुमन किरपा करिहौ
क्या मैं सरपंच सेमिल सकता हूँ ? – मैं सरपंच मेर मिल सकथौं का
क्या आज रविवार है ? – आज इतवार ए का

प्रश्नवाचक क्या, कौन, कैसे, कहाँ, कबः


आपक का नाम क्या है ? - तुँहर नाँव का है ?
तुम क्या चाहते हौ ? - तोला का होना ? / तैं का चाहथस ? / तो ला का चाही ?
तुम क्या कहना चाहते हो ? - तैं का कहना चाहत हस ?
रायपुर में क्या करती है ? - ओ हा रापुर मा का करथै ?
तुम कौन हो ? - तैं कउन हैं
बाजार कौन जाएगा ? - बजार कउन जाही ?
किससे मिलना है ? – कउन ला / काकर ले मिलना है ?
इस मकान का मालिक कौन है ? - ए मकान के गोसँइया कउन ए / है ?
वह आफिस कैसे जाता है ? - ओ आफिस का मा जाथै ?
क्या गाँ व में सड़क है ? - का गाँव मा (सड़क) डहर / रद्दा है ?
तुम कैसे लौटे ? - तैं कइसे बहुरे (लहुँटे) ?
आपके पुत्र की उम्र क्या है ? - तोर बाबू के का उमर है ?
यहाँ से गाँव कितनी दूर है ? - इहाँ ले गाँव कतका दुरिहा है ?
क्या नहर मैं पानी है ? - का नहर मा पानी है ?
फसल कैसी है ? - फसल कइसे है ?
आप हमारे यहाँ कब आ रहे हैं ? - तुमन हमर घर कब आवत हौ?
तुम कहीँ पढ़ते हो ? - तैं कहाँ पढ़थस ?
तुम कहाँ काम करते हो ? - तैं कहाँ काम करथस ?
तुम यहाँ क्यों बैठे हो ? - तैं इहाँ काबर बइठे हस ?
तुम कहाँ खेलते हो ? - तैं कहाँ खेलथस?
आप कब पूजा करते हैं ? – तुमन कब पूजा करथौ ?
क्या आप मेरी प्रतीक्षा करेंगे ? - तुमन मोला अगोरिहौ का ?
सब को बुलाओ ? - सब झन ला बलावौ ?
क्या आपने मुझे बुलाया ? - का तुमन मोला बलायौ ?
आपको मुझसे काम है ? - मोर करा कुछ काम है का तुमन ला ?
कौन आ रहा है ? - कउन आवत है ?
तुम्हारा नंबर क्या है ? - तोर नंबर का है ?
मुझ पर कोई विश्वास क्यों नहीं करता ? - मोला कउने काबर नइ पतियावै ?
तुम मेरी बात क्यों नहीं सुनते ? - तैं मोर बात ला काबर नइ सुनस ?
कल से देरी नही होगी - काली ले देरी नइ होवै
आज आँफिस बंद नहीं है - आज आफिस बंद नइ ए
आज गर्मी नहीं है - आज गरमी नइ ए
हम बचपन को कभी नहीं भूलते - हमन बचपन ला कभू रइ भूलान
कल रविवार होगा न - काली इतवार होही ना
तुम अँग्रेजी बोल सकते हो न ? - तैं अँग्रेजी गोठिया लेथस ना ?
कितना अच्छा मौसम है न ? - कतेक सुग्घर मौसम है ना ?
अपने को होशियार समझते हौ - अपन ला चतुर समझथस


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काली फेर मुलाकात होही (कल फिर मुलाकात होगी )

हाँ जाते- जाते एक गाना सुनते जाइए (जात-जात एक गाना सुनत जावव)
यह करमा गीत है (येह करमा गीत आय)

करमसेनी के आवती, जानी सुनी पार्वती
अहो राम घासी घर, लिहे अवतार
अहो चौक चंदन पिढ़ली मढ़ाये
मिलवा के डार टूटगे, अहो सखी
कहाँ जगावो मिलवा डार । अहो राम......
झक-झक कर झक झुम्मर, अहो सखि
अंगना जगाबो मिलवा डार । अहो राम...

हिन्दी अनुवाद-

करमसेनी का आना मालूम हुआ । पार्वती ने घसिये के घर अवतार लिया । चौक पूरा गया, पीढ़ा रखा गया और चंदन आदि लगाये गये । मिलवा की डाल टूट गई । अरी सखी डाल चमक रही है, झूम रही है । अरी सखी मिलवा की डाल कहाँ उगाएँगे ? सखी आँगन में डगाल को स्थापित करेंगे । (छत्तीसगढ़ में करमसेनी को ग्राम देवी या लोक देवी माना गया है )

राम-राम कल मिलेंगे (राम-राम कल फिर मिलेंगे)


Saturday, March 18, 2006

छत्तीसगढ़ी बोलना कैसे सीखें (दूसरा दिन)

छत्तीसगढ़ी बोलना कैसे सीखें ?

दूसरा दिन
(क्रमशः)

हिन्दी - छत्तीसगढ़ी

शिष्टाचार के कुछ वाक्यः

ठीक समय पर नहीं आ सका, माफ करें - टेम मा नई आए पाएँ, माफी देहौ
माफ कीजिए, मुझे छोड़ी-सी देर हो गई - देरी हो गै, माफी देहौ
गलती हो गई, मुझे दुःख है - गलती हो गै (चूक हो गै) मोला दुख हे
मुझे क्षमा करें - मोला छिमा करौ
ग़लती से हो गया,अब आगे ऐसा नहीं होगा- अउ आगू अब गलती नइ होवै, माफी देहौ
कुछ कहना (बताना) चाहता हूँ, मौका दें - कुछु कहे-बताए बर है, मौका दौ
ज़रा ध्यान दें, जरा सुनें, ज़रा बोलने दें - थोकुन ध्यान देहौ,सुनौ तो, बोलन दौ
जरा आगे आएँ या बढ़े, छोड़ा चुप रहें - थोकुन आगू बढ़ौ, रैगौ,
जोर से न बोलें - निरया के झन बोलौ या बोलव
इसे अपना ही समझें – येला अपनेच समझव
अपना समझकर उपयोग करें– तुम्हरे च तो आए, अपनेच समझौ अउ बउरौ
क्या मैं अंदर आ सकता हूँ - मैं भीतरी म आवंव
क्या मुझे बैठने दैंगे ? – मैं बैठौं या मोला बइठे बर देहू
क्या मैं बाहर जा सकता हूँ – मैं बाहिर जावौं या मैं बाहिर जावंव का
मैं यही बैठता हूँ – मैं येहींच (इहेंच) बइठथौं
मैं यहाँ खड़ा हूँ - ऐ मेर मंय ठाढ़े हौं
मैं छोड़ी देर रुकता हूँ – मैं थोरकुन ठहरत हौं
वह थोड़ी देर रुक गया – ओ ह थोरकुन बिलम गीस
थोड़ी देर बाद आऊँगा, जाऊँगा, खाऊँगा - मैं थोकुन बिलम के आहौं जाहौं, खाहौं
जैसी आपकी मर्जी – जइसे तुँहर इच्छा
आराम से बैठिए - बने बइठौ न जी
जल्दी-जल्दी मत कर -,सुसता लौ, लकर-लकर झन करौ
आपसे सलाह के लिए धन्यवाद – मिल के बने लागिस, बने बतायौ जी

पूरी कोशिश करूँगा / करूँगी - मैं अपने डाहर ले जम्मो उदिम करिहौं
आप ठीक हैं न – तूँ सुग्धर हौ न या तूँ नित्ता तो हौ
भगवान आपका भला करे - भगवान तुँहर भला करै
क्षमा करना, क्षमा माँगता हूँ -माफी देहौ, माफी माँगत हौ
ग़लती हो गई - गलती होगै, चूक होगै
मुझे खेद है (दुःख है) – मोला दुःख हे
साफ़-साफ़ बोलें, जोर से बोले, स्पष्ट कहों - बने फरी-फरी या सफ्फा गोठियावौ
साहब आ गए, आए हैं, - साहेब आइस हे, आए हैं, आइन हैं आगे
साहब न कहा है, बाबू ने बताया है – साहेब कहिस है, बाबू बताइस है
साहब बुला रहे हैं, चपरासी को बुलाओ - साहब बलावत है, चपरासी ला बला
सुनो, पानी ले कर आऔ, साहब ने कहा है - सुन, पानी लान, साहब कहिस है
फाइल लाओ, पेन में स्याही नहीं है -फाइल ल लान, पेन मा सियाही नइ ए
मैं कब से घंटी बजा रहा हूँ - कतेक बेर ले घंटी बजावत हौं
टेलिफोन बज रहा, उठाओ - बड़े साहेब आए है, टेलिफोन बाजत है, उठा
बड़ी गर्मी है – अड़बड़ गरमत हे
ठंड लग रही है या पानी गिर रहा है -जाड़ लागत है /पानी गीरत है

भावबोधक-शब्द एवं कथनः

वाह-वा- वाह-वाह - बने हस बाबू, वाह कमाल कर देस गा
जीतने वालों को शाबाशी दो –जितइया ला सबासी दे न गा
वाह, अहो, कितना सुंदर है –वाह, कतेक सुग्घर हे, बड़ सुग्घर है गा
ओ हो, इतना बड़ा – ओ हो, कतेक बड़ है गा, अरे ददा, कतेक बड़
तुमने तो कमान कर दिया –तैं तो कमाल कर दे
ईश्वर कृपा करें – भगवान तोर बढ़ोतरी करै, भगवान तोर भला करै
भगवान तुम्हारी उन्नति करें - भगवान तोर बढ़ोतरी करै, भगवान तोर भला करै
तुमको भी, आपको भी - तहूँ ला, तुहींच ला
बहुत बढ़िया – अड़बड़सुग्घर, बहुत बढ़िया
बड़ी खुशी का समाचार है – अघात(अड़बड़) खुसी के खबर समाचार है
प्रभु मेरे, दया कर –हे भगवान, दया करबे
आपका स्वागत है - तुँहर स्वागत हे
फटाफट काम करो - लहुआ-लङुआ कमा बाबू
वह जल्दी-जल्दी चलता है - ओह लकर-लकर रेंगथै
जल्दी करो भैया - लहुआ कर भैइया
चुप रहिए, हल्ला मत कीजिए – कलेचुप रहौ जी, हल्ला झन करौ ।
सच /सत्य बोलो - सत्बोलौ, सच बोलौ
झूठ मत बोरो - लबारी झन मारौ
धन्यवाद भाई - धन्यवाद भइया
बार-बार मत खाओ -घेरी-बेरी झन खाऔ
बधाई है आपको - तुँहला बदाई है
कितनीदुःखद बात है -अड़बड़ दुख के बात है
शर्म करो / शर्म नहीं है - शरप कर / तोला लाज नई लागै
आप जो चाहें - जइसे तुँहर मन / मरजी
छिः यह क्या है ? – छि (हाय) एहा काए दाई (ददा) ?


छोटे वाक्यांशः

मैं अभी जा रहा हूँ - मैं हा जावत हौं
हम तजा रहे हैं - हमन जावत हन
वे जा रहे हैं -ओ मन जावत हैं
बच्चे खेल रहे हैं - लइका मन खेलत हैं
लड़कियाँ पढ़ रही हैं - नोनी मन पढ़त हें
बहुत अच्छा - बने हे गा
बस, रहने दो - भइगे, रहन दै
क्यों नहीं ?- काबर नइ ?
कब आएगा ? - कतका जुवार आही ?
थोड़ा –सा भी नहीं ?-छोरकुन घलो नइ ?
कल मिलेंगे - काली मिलबो या काली मिलबोन
परसों आएँगे - परने दीन आबो ।
बहुत दिने से नहीं देखा - अड़बड़दिन ले नइ देखेहौं
अच्छा, चलते हैं - अच्छा, जात हन चलत हन
आइए - आवौ या आवव
बैठिए - बइठौ या बइठव
बाहर इंतजार करो - बाहिर अगोर
सीधे जाओ - सोझ जा
***************

आज बर एतका (आज के लिए इतना)

काली फेर नवा-नवा बात जानबोन (कल नई-नई बात जानेंगे)

जात-जात मोला एक ठिन छत्तीसगढ़ी गीत सुरता आगे (जाते-जाते मुझे एक छत्तीसगढी गीत याद आ गया है)

चली, वोही ला जुरमिल के गायीं (चलिए, उसे सम्मिलित स्वर में गाते हैं)

मैं बताना चाहूँ वो ह छ.ग. के बड़े गीतकार लक्ष्मण मस्तुरिहा के परसिद्ध गीत आय (मैं बताना चाहूँगा कि वह छत्तीसगढ़ के बड़े प्रसिद्ध गीतकार लक्ष्मण मस्तुरिहा जी का गीत है)
गीतः
मोर संग चलव रे, मोर संग चलव जी
वो गिरे थके हपटे मन
अउ परे डरे मनखे मन
मोर संग चलव रे, मोर संग चलव जी

अमरइया कस जुड़ छाँव में
मोर संग बइठ जुड़ालव
पानी पी लव मैं सागर अंव
दुख पीरा बिसरालव
नवा जोत लव नवा गाँव बर, रस्ता नवा गढ़व रे

(मित्रो, यह उनका ऐसा गीत है जिसे सभी छत्तीसगढिया गाते-गुनगुनाते हैं । यह इतना प्रसिद्ध गीत है कि इसे विश्व के कई देशों के रेडियोवाले बजा चुके हैं )

मित्रो, अब चलते हैं । मेरी पत्नी पूछ रही थी कि इस पाठ से तुम्हें क्या मिलेगा ? क्या आप भी ऐसा समझते हैं कि आत्मसंतोष नहीं मिलेगा मुझे । नहीं ना । तो मैं कल्पना जी से कह देता हूँ कि आप लोग इसका लाभ उठा रहे हैं । हाथ कंगन को आरसी क्या । पढ़े लिखे को फारसी क्या । चलिए, उसके संतोष के लिए एक पत्र ही लिख दीजिए हमें । तो वह भी तल्लीनता के साथ इसे पोस्ट करने में सहयोग किया करेगी ।
पत्र की प्रतीक्षा में । हाँ वही- ई-मेल भाई..........

राम-राम भइया मन ।

Friday, March 17, 2006

छत्तीसगढ़ी बोलना कैसे सीखें (पहला दिन)

छत्तीसगढ़ी बोलना कैसे सीखें ?

छत्तीसगढ़ी बड़ी ही सरल भाषा है । जो हिन्दी बोलना जानता है उसे छत्तीसगढ़ी बोलने, सीखने और लिखने में कोई समस्या नहीं होती है । यदि आपने ठान लिया है कि आप पूर्वी हिन्दी की प्रमुख भाषा ‘छत्तीसगढ़ी’ में रचा-पची संस्कृति, साहित्यिक वैभव को जानना चाहते हैं तो हम आपका स्वागत करते हैं । प्रतिदिन मात्र एक घंटा समय देकर आप यह भाषा बोलने, समझने एवं पढने तथा लिखने में पारंगत हो सकते हैं । हम प्रतिदिन एक पाठ पढ़ा करेंगे । देखते ही देखते 15-20 दिन में आप हमसे भी अधिक अच्छा छत्तीसगढ़ी बोलना सीख जायेंगे । यह हमारा विश्वास ही है । शुभस्य शीघ्रम् । क्यों न आज जी से हम शुरू कर दें ।

आज हम छत्तीसगढ़ी के महत्वपूर्ण शब्दों से परिचित होते हैं । तो चलिए नाः-

पहला दिन

हिन्दी छत्तीसगढ़ी

पिता – दादा, सियान, बाबू
माँ - दाई, महतारी, माँ
दादा - बबा
नाना - बबा ,नाना ,ममा ददा
दादी – बूढ़ीदाई, दादी
नानी – कका
चाची - काकी
ताऊ - बड़ा ददा
मित्रता के आधार पर – फूल ददा, मितनहा ददा,
महापरसाद
ताई – बड़े दाई, फूल दाई, मितनहा
एक ही नाम होने पर - सहिना ददा, सहिना दाई
मित्र – सहिनाव, संगी
पुत्र - बाबू, बड़े बाबू (लइका)
प्रथम पुत्र - पहिलावत लइका
पुत्री - नोनी, बड़े छोकरी, बड़े नोनी
जेठ – कुरा ससुर, डेर ससुर
देवर - देवर
बड़ा साला - डेर सारा
बड़ी साली – डेर सारी
बुआ - फूफू
बूआ का पति - फूफा

अभिवादन :

(उम्र में बड़े रिश्तेदार या अन्य) प्रणाम, नमस्कार – पाँव परत हौं, पा लागी
(बराबरी मित्र) नमस्ते, नमस्कार – राम –राम जोहार
(आशीर्वाद )खुश रहो, आयुष्मान, जीते रहो – खुसी रहौ, जियत रहौ ,अम्मर रहौ ।
प्रणाम पापा, - बाबूजी-पाँव परत हौं ददा, बाबू
प्रणाम ददा जी - पा लागी ददा
प्रणाम ताऊ जी – पा लागी बड़ ददा
प्रणाम माँ (पुरुष द्वारा) - पा लागी दाई, (माँ)
प्रणाम माँ (स्त्री द्वारा) – पाँव परत हौं दाई
प्रणाम (चाचा, मामा, नाना, अन्य संबंधी) - पा लागी कका, ममा, नना,फूफू आदि ।
प्रणाम माँ ,नानी,दादी,चाची, ताई, बुआ, मामी - पाँर परत हौं दाई, काकी,फूफू,मामी
प्रणाम चाचा जी (एक नाम वाले हों) – पा लागी सहिना कका ,ददा फूफा
पाँ परत हौं सहिना दाई फूल दाई
प्रणाम नमस्कार मित्र (या नाम से संबोधन) – राम-राम मितान, राम-राम संगी

गैर- संबंधी बुजुर्ग :


प्रणाम (नमस्कार),चाचा जी,दादाजी, भाई साहब -पा लागी कका, ददा,बड़ेददा सियान, भाई
समकक्ष-नमस्कार – मित्र राम-राम मितान, संगी, संगवारी

गुरु, पुजारी, ब्राह्मणः

प्रणाम गुरुजी, सर - पा लागी गुरुजी
प्रणाम पंडित जी,महराज - पालागी महराज, पा लागी बाम्हन देंवता

अधिकारी / प्रतिष्ठित वर्ग या अन्य आदरणीय व्यक्तिः


साहब राम-राम – राम-राम साहेब
राम-राम बाबू जी – राम-राम बड़े बाबू
राम-राम साहब – राम-राम पंच, रसपंच
या नमस्ते,नमस्कार,साहब – राम-राम गुरुजी, राम – राम मितान, राम-राम जँवारा / संगी

आशीर्वाद / आशीर्वचनः


खुस रहो / जीते रहो /जीती रहो / बेटा / बेदी - खुसी रह / जियत रह बेटा / बेदी
चिरंजीव रहो.- अम्मर रह
आयुष्मान-भव – मस्त रह
सौभाग्यवती भव- तोर चुरी अम्मर रहै
सदा सुहागन रहो – एँहवाती रह, तोर सदा देवारी रहै
सामान्य शिष्टाचारः

आइए –बाबाजी, काका जी ,वैठिए – आवौ, आवौ गा, कका ,बबा, सब बने –बने हौ न
आसन ग्रहण करें- आवौ बइठो
कैसे हो –सब राजी-खुशी है न – कइसे हस गा, सब बने-बने हौ न
कैसे हैं ? हमारी याद आती है न
बहुत दिनों बाद दर्शन दिए, क्या बात है ? - कइसे हौ,हमर सुरता आथे न, अड़बड़ दिन मा आए हौ, का बात हे ?
याद नहीं आती क्या- सुरता नई आवय का
आते रहा करें- अइसने दया-मया राखौ, आए करौ
बड़ी कृपा की बडी किरपा करौ
लाओ पानी-वानी साहब के लिए- लान रे पानी-वनी साहेब बर
भोजन का समय हो गया, खा के जाइये- खाय के बेरा हो गै हे,खा-पी के जाहौ

आदरसूचकः

आप - तुमन, तूँ मन, तूँ
आप बताइए- तुमन या तूँ बतावौ
आप ने कहा- तुमन कहौ
तुम बैठ जाओ- तैं बइठ जा
तुम भाग जाओ- तैं भाग जा, तैं हट जा
आप कहें (स्त्री)- तुमन कहौ (ओ)
आप कहें (पुरूष)- तुमन कहौ जी, गा
आपका क्या नाम है- तुँहर का नाव आय
आप कहाँ रहते हैं- तुमन केती रहिथव
तुमन कहाँ रहिथौ
मैं क्या मदद कर सकता हूँ- मैं तुँहर बर का करे सकत हौं
कृपया संकोच न करें- सकुचावौ झन
साफ़-साफ़ बता दें- फरी-फरी बता दौ
ठीक है मैं देखूँगा- ठीक हे, मैं देखिहंव
आप कल आइए- तुमन काली आवौ

कल हम फिर मिलेंगे पर जाते-जाते मुझे एक पंक्ति याद आ रही है-

राम धरे धनु, लछिमन धरे बान
सीता मइया के खोज में निकर गे हनुमान ।


अब इसका हिन्दी अनुवाद भी तो जानते जाइयेः-

राम धनुष धारण किये हुए हैं । लक्ष्मण वाण धारण किये हुए हैं ।
सीता माता का पता लगाने हनुमान निकल पड़े हैं ।

राम-राम संगी मन ! काली फेर मिलबोन । (मित्रगण नमस्कार, कल फिर मिलेंगे)
हाँ, आज के पाठ में किसी प्रकार की कठिनाई है तो हमें जरूर बतायेंगे ।
प्रस्तुतिः जयप्रकाश मानस

Friday, March 10, 2006

छत्तीसगढ़ी यानी सबले सुग्घर भासा


छत्तीसगढ़ हमार देस के सीरिफ राज्य नोहे । येहर हमार अस्मिता घलोक आय । हम भारत के रहोय्या अन । फेर येतका कहेले हमार सब्बो परिचय नइ मिलय । छत्तीसगढ़ी हमार भासा आय । येही हर हमार चिन्हारी के असली चिन्हा आय । येला भूलायन तो सबला भूलायन । छत्तीसगढ़ी अइसन भाखा आय जेन म हम पहिचाने जाथन । हमार सब्बो छत्तीसगढ़ी के कारन थोरकुन अलग हे । जैसे- आचरण । जैसे सोच । जैसे-सोच । जैसे- हमर समझदारी । जैसे- हमर जिनगी ला देखे के तरीका । कहे गे हावय- जाखर जइसन भासा तेखर वइसन आसा । येही आस-विस्वास ह हमन ला सबसे सुग्घर बनाथे अउ मन ले बिनकहे निकलथे- 'छत्तीसगढ़ियाः सबले बढ़िया ।' येमा कोन्हो ला कोइ संखा नइ हे