छत्तीसगढ़ी यानी सबले सुग्घर भासा

छत्तीसगढ़ हमार देस के सीरिफ राज्य नोहे । येहर हमार अस्मिता घलोक आय । हम भारत के रहोय्या अन । फेर येतका कहेले हमार सब्बो परिचय नइ मिलय । छत्तीसगढ़ी हमार भासा आय । येही हर हमार चिन्हारी के असली चिन्हा आय । येला भूलायन तो सबला भूलायन । छत्तीसगढ़ी अइसन भाखा आय जेन म हम पहिचाने जाथन । हमार सब्बो छत्तीसगढ़ी के कारन थोरकुन अलग हे । जैसे- आचरण । जैसे सोच । जैसे-सोच । जैसे- हमर समझदारी । जैसे- हमर जिनगी ला देखे के तरीका । कहे गे हावय- जाखर जइसन भासा तेखर वइसन आसा । येही आस-विस्वास ह हमन ला सबसे सुग्घर बनाथे अउ मन ले बिनकहे निकलथे- 'छत्तीसगढ़ियाः सबले बढ़िया ।' येमा कोन्हो ला कोइ संखा नइ हे ।

3 Comments:
बहुत बढ़िया प्रयास है। बधाई!
कृपया निम्न वाक्य को ठीक कर लें तो अच्छा रहेगा।
ये पुस्तकें मेरी हैं। - इहीच कलम मोर ए ।
चन्द्र मोहन रावल
बने लागिस, मैंने तो सोचा भी नहीं था कि छत्तीसगढ़ी सीखाने वाला ब्लॉग भी होगा. प्रयास तो नहीं कहूंगा पर आपने अच्छे से अच्छा काम किया है. मैंने दिल्ली में रहते महसूस किया है कि अपने स्थान से दूर रहने पर नए स्थान पर अपने स्थान की भाषाएं एक दूसरे को जोड़ने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
यह काम और आगे बढ़ता रहे.
शुभकामनाएं
तेजपाल सिंह हंसपाल, रायपुर(छत्तीसगढ़)
beautiful effort keep doing
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