Friday, March 17, 2006

छत्तीसगढ़ी बोलना कैसे सीखें (पहला दिन)

छत्तीसगढ़ी बोलना कैसे सीखें ?

छत्तीसगढ़ी बड़ी ही सरल भाषा है । जो हिन्दी बोलना जानता है उसे छत्तीसगढ़ी बोलने, सीखने और लिखने में कोई समस्या नहीं होती है । यदि आपने ठान लिया है कि आप पूर्वी हिन्दी की प्रमुख भाषा ‘छत्तीसगढ़ी’ में रचा-पची संस्कृति, साहित्यिक वैभव को जानना चाहते हैं तो हम आपका स्वागत करते हैं । प्रतिदिन मात्र एक घंटा समय देकर आप यह भाषा बोलने, समझने एवं पढने तथा लिखने में पारंगत हो सकते हैं । हम प्रतिदिन एक पाठ पढ़ा करेंगे । देखते ही देखते 15-20 दिन में आप हमसे भी अधिक अच्छा छत्तीसगढ़ी बोलना सीख जायेंगे । यह हमारा विश्वास ही है । शुभस्य शीघ्रम् । क्यों न आज जी से हम शुरू कर दें ।

आज हम छत्तीसगढ़ी के महत्वपूर्ण शब्दों से परिचित होते हैं । तो चलिए नाः-

पहला दिन

हिन्दी छत्तीसगढ़ी

पिता – दादा, सियान, बाबू
माँ - दाई, महतारी, माँ
दादा - बबा
नाना - बबा ,नाना ,ममा ददा
दादी – बूढ़ीदाई, दादी
नानी – कका
चाची - काकी
ताऊ - बड़ा ददा
मित्रता के आधार पर – फूल ददा, मितनहा ददा,
महापरसाद
ताई – बड़े दाई, फूल दाई, मितनहा
एक ही नाम होने पर - सहिना ददा, सहिना दाई
मित्र – सहिनाव, संगी
पुत्र - बाबू, बड़े बाबू (लइका)
प्रथम पुत्र - पहिलावत लइका
पुत्री - नोनी, बड़े छोकरी, बड़े नोनी
जेठ – कुरा ससुर, डेर ससुर
देवर - देवर
बड़ा साला - डेर सारा
बड़ी साली – डेर सारी
बुआ - फूफू
बूआ का पति - फूफा

अभिवादन :

(उम्र में बड़े रिश्तेदार या अन्य) प्रणाम, नमस्कार – पाँव परत हौं, पा लागी
(बराबरी मित्र) नमस्ते, नमस्कार – राम –राम जोहार
(आशीर्वाद )खुश रहो, आयुष्मान, जीते रहो – खुसी रहौ, जियत रहौ ,अम्मर रहौ ।
प्रणाम पापा, - बाबूजी-पाँव परत हौं ददा, बाबू
प्रणाम ददा जी - पा लागी ददा
प्रणाम ताऊ जी – पा लागी बड़ ददा
प्रणाम माँ (पुरुष द्वारा) - पा लागी दाई, (माँ)
प्रणाम माँ (स्त्री द्वारा) – पाँव परत हौं दाई
प्रणाम (चाचा, मामा, नाना, अन्य संबंधी) - पा लागी कका, ममा, नना,फूफू आदि ।
प्रणाम माँ ,नानी,दादी,चाची, ताई, बुआ, मामी - पाँर परत हौं दाई, काकी,फूफू,मामी
प्रणाम चाचा जी (एक नाम वाले हों) – पा लागी सहिना कका ,ददा फूफा
पाँ परत हौं सहिना दाई फूल दाई
प्रणाम नमस्कार मित्र (या नाम से संबोधन) – राम-राम मितान, राम-राम संगी

गैर- संबंधी बुजुर्ग :


प्रणाम (नमस्कार),चाचा जी,दादाजी, भाई साहब -पा लागी कका, ददा,बड़ेददा सियान, भाई
समकक्ष-नमस्कार – मित्र राम-राम मितान, संगी, संगवारी

गुरु, पुजारी, ब्राह्मणः

प्रणाम गुरुजी, सर - पा लागी गुरुजी
प्रणाम पंडित जी,महराज - पालागी महराज, पा लागी बाम्हन देंवता

अधिकारी / प्रतिष्ठित वर्ग या अन्य आदरणीय व्यक्तिः


साहब राम-राम – राम-राम साहेब
राम-राम बाबू जी – राम-राम बड़े बाबू
राम-राम साहब – राम-राम पंच, रसपंच
या नमस्ते,नमस्कार,साहब – राम-राम गुरुजी, राम – राम मितान, राम-राम जँवारा / संगी

आशीर्वाद / आशीर्वचनः


खुस रहो / जीते रहो /जीती रहो / बेटा / बेदी - खुसी रह / जियत रह बेटा / बेदी
चिरंजीव रहो.- अम्मर रह
आयुष्मान-भव – मस्त रह
सौभाग्यवती भव- तोर चुरी अम्मर रहै
सदा सुहागन रहो – एँहवाती रह, तोर सदा देवारी रहै
सामान्य शिष्टाचारः

आइए –बाबाजी, काका जी ,वैठिए – आवौ, आवौ गा, कका ,बबा, सब बने –बने हौ न
आसन ग्रहण करें- आवौ बइठो
कैसे हो –सब राजी-खुशी है न – कइसे हस गा, सब बने-बने हौ न
कैसे हैं ? हमारी याद आती है न
बहुत दिनों बाद दर्शन दिए, क्या बात है ? - कइसे हौ,हमर सुरता आथे न, अड़बड़ दिन मा आए हौ, का बात हे ?
याद नहीं आती क्या- सुरता नई आवय का
आते रहा करें- अइसने दया-मया राखौ, आए करौ
बड़ी कृपा की बडी किरपा करौ
लाओ पानी-वानी साहब के लिए- लान रे पानी-वनी साहेब बर
भोजन का समय हो गया, खा के जाइये- खाय के बेरा हो गै हे,खा-पी के जाहौ

आदरसूचकः

आप - तुमन, तूँ मन, तूँ
आप बताइए- तुमन या तूँ बतावौ
आप ने कहा- तुमन कहौ
तुम बैठ जाओ- तैं बइठ जा
तुम भाग जाओ- तैं भाग जा, तैं हट जा
आप कहें (स्त्री)- तुमन कहौ (ओ)
आप कहें (पुरूष)- तुमन कहौ जी, गा
आपका क्या नाम है- तुँहर का नाव आय
आप कहाँ रहते हैं- तुमन केती रहिथव
तुमन कहाँ रहिथौ
मैं क्या मदद कर सकता हूँ- मैं तुँहर बर का करे सकत हौं
कृपया संकोच न करें- सकुचावौ झन
साफ़-साफ़ बता दें- फरी-फरी बता दौ
ठीक है मैं देखूँगा- ठीक हे, मैं देखिहंव
आप कल आइए- तुमन काली आवौ

कल हम फिर मिलेंगे पर जाते-जाते मुझे एक पंक्ति याद आ रही है-

राम धरे धनु, लछिमन धरे बान
सीता मइया के खोज में निकर गे हनुमान ।


अब इसका हिन्दी अनुवाद भी तो जानते जाइयेः-

राम धनुष धारण किये हुए हैं । लक्ष्मण वाण धारण किये हुए हैं ।
सीता माता का पता लगाने हनुमान निकल पड़े हैं ।

राम-राम संगी मन ! काली फेर मिलबोन । (मित्रगण नमस्कार, कल फिर मिलेंगे)
हाँ, आज के पाठ में किसी प्रकार की कठिनाई है तो हमें जरूर बतायेंगे ।
प्रस्तुतिः जयप्रकाश मानस

8 Comments:

At 6:18 PM, Blogger अभिनव said...

आपका ब्लाग देख कर अच्छा लगा।
छत्तिसगढ़िया, सबसे बढ़िया।

अभिनव

 
At 8:22 PM, Blogger Raviratlami said...

वा भई. बहुत सुग्घर बात ल लिखे हस. हमरो मन के छत्तीसगढ़ी भासा ह सुधर जाही.

 
At 3:06 AM, Blogger Sanjeeva Tiwari said...

हमर भासा ल दुसर मन ला सीखाय बर आप मन के परयास बर मोर कोपरा कोपरा, झौहा झौंहा बधाई, सब्बे छत्तीसगढ़ी भाई मन ला एक दुसर के हिम्मत बढाये ले अईसनहे छत्तीसगढ़ी के विकाश होहि ।
bhilai-durg.blogspot.com

 
At 9:23 PM, Blogger magahi said...

क्या छत्तीसगढ़ी बोली के लिए कोई प्रकाशित विस्तृत व्याकरण है ? यदि हाँ, तो कृपया इस पुस्तक को मँगाने के लिए सम्पूर्ण पता दें ।

बोलने की अपेक्षा मैं जल्द-से-जल्द छत्तीसगढ़ी में पढ़ने के लायक बनना चाहता हूँ । क्या आप छत्तीसगढ़ी व्याकरण केवल चार-पाँच पृष्ठों में तैयार कर जालस्थान पर डाल सकते हैं ?

अपने छात्र-जीवन के दौरान मैं उड़िया सीखने के लिए एक उड़ियाभाषी से केवल तीन पृष्ठों में व्याकरण तैयार करवाया था । इतना मेरे लिए काफी था । एक मास के अन्दर मैं उड़िया में बच्चों के लिए 108 पृष्ठों में छपा महाभारत पढ़ सकने में सफल हो गया ।

--- नारायण प्रसाद

 
At 6:14 AM, Blogger Manoj Kumar said...

I am a engineer in chennai , but i belongs to chhattisgarh. Realy I liked it to see someone as a proud to be a chhattisgarhiya. I also proud to be the same. Only two word I want to say . CHHATTISGARHIYA, SABSE BADHIYA...

 
At 11:06 PM, Blogger Dr Satyajit Sahu said...

very good effort

 
At 9:31 PM, Blogger ललित शर्मा said...

छत्तीसगढी सिखाए के बने बुता करत हव आप मन हां
सीखाय बर आप मन के परयास बर मोर कोपरा कोपरा, झौहा झौंहा बधाई,

जय जोहार

 
At 7:01 AM, Blogger BHISHAM KRISHE said...

लगे रहो भाई

 

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