छत्तीसगढ़ी बोलना कैसे सीखें (दूसरा दिन)
छत्तीसगढ़ी बोलना कैसे सीखें ?
दूसरा दिन
(क्रमशः)
हिन्दी - छत्तीसगढ़ी
शिष्टाचार के कुछ वाक्यः
ठीक समय पर नहीं आ सका, माफ करें - टेम मा नई आए पाएँ, माफी देहौ
माफ कीजिए, मुझे छोड़ी-सी देर हो गई - देरी हो गै, माफी देहौ
गलती हो गई, मुझे दुःख है - गलती हो गै (चूक हो गै) मोला दुख हे
मुझे क्षमा करें - मोला छिमा करौ
ग़लती से हो गया,अब आगे ऐसा नहीं होगा- अउ आगू अब गलती नइ होवै, माफी देहौ
कुछ कहना (बताना) चाहता हूँ, मौका दें - कुछु कहे-बताए बर है, मौका दौ
ज़रा ध्यान दें, जरा सुनें, ज़रा बोलने दें - थोकुन ध्यान देहौ,सुनौ तो, बोलन दौ
जरा आगे आएँ या बढ़े, छोड़ा चुप रहें - थोकुन आगू बढ़ौ, रैगौ,
जोर से न बोलें - निरया के झन बोलौ या बोलव
इसे अपना ही समझें – येला अपनेच समझव
अपना समझकर उपयोग करें– तुम्हरे च तो आए, अपनेच समझौ अउ बउरौ
क्या मैं अंदर आ सकता हूँ - मैं भीतरी म आवंव
क्या मुझे बैठने दैंगे ? – मैं बैठौं या मोला बइठे बर देहू
क्या मैं बाहर जा सकता हूँ – मैं बाहिर जावौं या मैं बाहिर जावंव का
मैं यही बैठता हूँ – मैं येहींच (इहेंच) बइठथौं
मैं यहाँ खड़ा हूँ - ऐ मेर मंय ठाढ़े हौं
मैं छोड़ी देर रुकता हूँ – मैं थोरकुन ठहरत हौं
वह थोड़ी देर रुक गया – ओ ह थोरकुन बिलम गीस
थोड़ी देर बाद आऊँगा, जाऊँगा, खाऊँगा - मैं थोकुन बिलम के आहौं जाहौं, खाहौं
जैसी आपकी मर्जी – जइसे तुँहर इच्छा
आराम से बैठिए - बने बइठौ न जी
जल्दी-जल्दी मत कर -,सुसता लौ, लकर-लकर झन करौ
आपसे सलाह के लिए धन्यवाद – मिल के बने लागिस, बने बतायौ जी
पूरी कोशिश करूँगा / करूँगी - मैं अपने डाहर ले जम्मो उदिम करिहौं
आप ठीक हैं न – तूँ सुग्धर हौ न या तूँ नित्ता तो हौ
भगवान आपका भला करे - भगवान तुँहर भला करै
क्षमा करना, क्षमा माँगता हूँ -माफी देहौ, माफी माँगत हौ
ग़लती हो गई - गलती होगै, चूक होगै
मुझे खेद है (दुःख है) – मोला दुःख हे
साफ़-साफ़ बोलें, जोर से बोले, स्पष्ट कहों - बने फरी-फरी या सफ्फा गोठियावौ
साहब आ गए, आए हैं, - साहेब आइस हे, आए हैं, आइन हैं आगे
साहब न कहा है, बाबू ने बताया है – साहेब कहिस है, बाबू बताइस है
साहब बुला रहे हैं, चपरासी को बुलाओ - साहब बलावत है, चपरासी ला बला
सुनो, पानी ले कर आऔ, साहब ने कहा है - सुन, पानी लान, साहब कहिस है
फाइल लाओ, पेन में स्याही नहीं है -फाइल ल लान, पेन मा सियाही नइ ए
मैं कब से घंटी बजा रहा हूँ - कतेक बेर ले घंटी बजावत हौं
टेलिफोन बज रहा, उठाओ - बड़े साहेब आए है, टेलिफोन बाजत है, उठा
बड़ी गर्मी है – अड़बड़ गरमत हे
ठंड लग रही है या पानी गिर रहा है -जाड़ लागत है /पानी गीरत है
भावबोधक-शब्द एवं कथनः
वाह-वा- वाह-वाह - बने हस बाबू, वाह कमाल कर देस गा
जीतने वालों को शाबाशी दो –जितइया ला सबासी दे न गा
वाह, अहो, कितना सुंदर है –वाह, कतेक सुग्घर हे, बड़ सुग्घर है गा
ओ हो, इतना बड़ा – ओ हो, कतेक बड़ है गा, अरे ददा, कतेक बड़
तुमने तो कमान कर दिया –तैं तो कमाल कर दे
ईश्वर कृपा करें – भगवान तोर बढ़ोतरी करै, भगवान तोर भला करै
भगवान तुम्हारी उन्नति करें - भगवान तोर बढ़ोतरी करै, भगवान तोर भला करै
तुमको भी, आपको भी - तहूँ ला, तुहींच ला
बहुत बढ़िया – अड़बड़सुग्घर, बहुत बढ़िया
बड़ी खुशी का समाचार है – अघात(अड़बड़) खुसी के खबर समाचार है
प्रभु मेरे, दया कर –हे भगवान, दया करबे
आपका स्वागत है - तुँहर स्वागत हे
फटाफट काम करो - लहुआ-लङुआ कमा बाबू
वह जल्दी-जल्दी चलता है - ओह लकर-लकर रेंगथै
जल्दी करो भैया - लहुआ कर भैइया
चुप रहिए, हल्ला मत कीजिए – कलेचुप रहौ जी, हल्ला झन करौ ।
सच /सत्य बोलो - सत्बोलौ, सच बोलौ
झूठ मत बोरो - लबारी झन मारौ
धन्यवाद भाई - धन्यवाद भइया
बार-बार मत खाओ -घेरी-बेरी झन खाऔ
बधाई है आपको - तुँहला बदाई है
कितनीदुःखद बात है -अड़बड़ दुख के बात है
शर्म करो / शर्म नहीं है - शरप कर / तोला लाज नई लागै
आप जो चाहें - जइसे तुँहर मन / मरजी
छिः यह क्या है ? – छि (हाय) एहा काए दाई (ददा) ?
छोटे वाक्यांशः
मैं अभी जा रहा हूँ - मैं हा जावत हौं
हम तजा रहे हैं - हमन जावत हन
वे जा रहे हैं -ओ मन जावत हैं
बच्चे खेल रहे हैं - लइका मन खेलत हैं
लड़कियाँ पढ़ रही हैं - नोनी मन पढ़त हें
बहुत अच्छा - बने हे गा
बस, रहने दो - भइगे, रहन दै
क्यों नहीं ?- काबर नइ ?
कब आएगा ? - कतका जुवार आही ?
थोड़ा –सा भी नहीं ?-छोरकुन घलो नइ ?
कल मिलेंगे - काली मिलबो या काली मिलबोन
परसों आएँगे - परने दीन आबो ।
बहुत दिने से नहीं देखा - अड़बड़दिन ले नइ देखेहौं
अच्छा, चलते हैं - अच्छा, जात हन चलत हन
आइए - आवौ या आवव
बैठिए - बइठौ या बइठव
बाहर इंतजार करो - बाहिर अगोर
सीधे जाओ - सोझ जा
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आज बर एतका (आज के लिए इतना)
काली फेर नवा-नवा बात जानबोन (कल नई-नई बात जानेंगे)
जात-जात मोला एक ठिन छत्तीसगढ़ी गीत सुरता आगे (जाते-जाते मुझे एक छत्तीसगढी गीत याद आ गया है)
चली, वोही ला जुरमिल के गायीं (चलिए, उसे सम्मिलित स्वर में गाते हैं)
मैं बताना चाहूँ वो ह छ.ग. के बड़े गीतकार लक्ष्मण मस्तुरिहा के परसिद्ध गीत आय (मैं बताना चाहूँगा कि वह छत्तीसगढ़ के बड़े प्रसिद्ध गीतकार लक्ष्मण मस्तुरिहा जी का गीत है)
गीतः
मोर संग चलव रे, मोर संग चलव जी
वो गिरे थके हपटे मन
अउ परे डरे मनखे मन
मोर संग चलव रे, मोर संग चलव जी
अमरइया कस जुड़ छाँव में
मोर संग बइठ जुड़ालव
पानी पी लव मैं सागर अंव
दुख पीरा बिसरालव
नवा जोत लव नवा गाँव बर, रस्ता नवा गढ़व रे
(मित्रो, यह उनका ऐसा गीत है जिसे सभी छत्तीसगढिया गाते-गुनगुनाते हैं । यह इतना प्रसिद्ध गीत है कि इसे विश्व के कई देशों के रेडियोवाले बजा चुके हैं )
मित्रो, अब चलते हैं । मेरी पत्नी पूछ रही थी कि इस पाठ से तुम्हें क्या मिलेगा ? क्या आप भी ऐसा समझते हैं कि आत्मसंतोष नहीं मिलेगा मुझे । नहीं ना । तो मैं कल्पना जी से कह देता हूँ कि आप लोग इसका लाभ उठा रहे हैं । हाथ कंगन को आरसी क्या । पढ़े लिखे को फारसी क्या । चलिए, उसके संतोष के लिए एक पत्र ही लिख दीजिए हमें । तो वह भी तल्लीनता के साथ इसे पोस्ट करने में सहयोग किया करेगी ।
पत्र की प्रतीक्षा में । हाँ वही- ई-मेल भाई..........
राम-राम भइया मन ।

2 Comments:
भाई लछीमन मस्तुरिहा के गीत सुनाये भाई अडबड मजा आयीस छत्तीसगढी भासा के अईसनहे कई ठन जुना गीत अउ ददरीया हावय फेर ठोली बोलि ह मोर अउ समाज अंतस में बैठे छत्तीसगढी म छा गे हे । पहिरे हरा रंग के सारी ओ लोटा वाले दुनो बहीनि अउ दूसर जुंना गीत के संकलन आप मन के कोठी म होही त लीखहू अउ भौजी ला कहीहू के छत्तीसगढी के सुनईया चहईया चाहे एक झीन ही काबर ना होय हिम्मत मत हारो लगे रहो भागीरथी गंगा आही अउ जरूर आही । हमर भईया के हिम्मत तो आप हव जुर मिल के छत्तीसगढ महतारी के सेवा करव । मेकरा जाला म मोर लईक कोनो सहयोग होही ता मोला कहव छत्तीसगढी बर मैं अपन समय जरूर देहूं ।
bhilai-durg.blogspot.com
भाई लछीमन मस्तुरिहा के गीत सुनाये भाई अडबड मजा आयीस छत्तीसगढी भासा के अईसनहे कई ठन जुना गीत अउ ददरीया हावय फेर ठोली बोलि ह मोर अउ समाज अंतस में बैठे छत्तीसगढी म छा गे हे । पहिरे हरा रंग के सारी ओ लोटा वाले दुनो बहीनि अउ दूसर जुंना गीत के संकलन आप मन के कोठी म होही त लीखहू अउ भौजी ला कहीहू के छत्तीसगढी के सुनईया चहईया चाहे एक झीन ही काबर ना होय हिम्मत मत हारो लगे रहो भागीरथी गंगा आही अउ जरूर आही । हमर भईया के हिम्मत तो आप हव जुर मिल के छत्तीसगढ महतारी के सेवा करव । मेकरा जाला म मोर लईक कोनो सहयोग होही ता मोला कहव छत्तीसगढी बर मैं अपन समय जरूर देहूं ।
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