Saturday, April 08, 2006

छत्तीसगढ़ी बोलना कैसे सीखें (चौंथा दिन)

छत्तीसगढ़ी बोलना कैसे सीखें ?

चौंथा दिन
(क्रमशः)

हिन्दी - छत्तीसगढ़ी

वह, यह, मैं, प्रत्येक, कोई, नहीः

यह रामू है। – ए हा रामू ए।
वह सीता है। - ओ ह सीता ए।
तुम एक छात्र हो। - तैं एक पढ़इया लइका अस ।
वह एक क्लर्क है। - ओ एक बाबू आय ।
वह गुरुजी है्। - ओ गुरुजी ए ।
मैं भारतीय हूँ। - मैं भारतीय औं / हौं ।
वे हिंदू हैं । - ओमन हिंदू एँ ।
वह मेरी बकरी है। - ओ मोर छेरी ए ।
यही कलम मेरी है। - इहीच कलम मोर ए ।
ये पुस्तकें मेरी हैं। - इहीच कलम मोर ए ।
यह किताब तुम्हारी है। – ए किताब मोर ए।
यह घर आपका है। - ए घर तोर ए ।
वह आफ़िस है। - ओ आफिस ए ।
वह क्या है । – ओ का ए ।
वह बैल है। - ओ हा बइला ए ।
भरत हमारा देश है । - भारत हमर देस ए ।
वह कम्प्यूदर है । -ओ कम्प्यूटर ए ।
यह मेरा कैसेट है । - ए मोर केसेट ए ।


स्थानसूचक समयसूचकः

पुस्तक बाँक्स में है । - किताब पेटी उपर है ।
नोट बाक्स में है । -नोट पेटी म है ।
क्लर्क सीट पर बैठ है । - बाबू कुर्सी मा बइठे हे ।
पिता जी दरवाजे पर खड़े हैं । - ददा ह दुवारी म ठाड़े हे ।
वह घर पर मिलेगा । - ओ हा घर म मिलही ।
स्कूल के चारों तरफ मैदान है । - इस्कूल के चारों मुड़ा भाँठा हे ।
बगीचे में हरे-भरे वृक्ष हैं । - बगीचा म हरियर-हरियर रुख मन हे ।
औरतें तालाब में नहा रही हैं । - माईलोगन तरिया मा नहात हे ।
लोग नदी में नहा रहे हैं । - लोगन नदिया मा नहात हैं ।
वह आफ़िस से बाहर निकला । - ओ आफ़िस ले बाहिर निकलिस ।
इसका अँग्रेजी में अनुवाद करो । - एकर अँग्रेजी म अनुवाद करौ ।
छत्तीसगढ़ भारत के दक्षिणपूर्वी भाग में है । - छत्तीसगढ़ भारत के जेवनी-उत्ती म हे ।
महानदी पर पुल है । - महानदी म पुलिया हे ।
गँगरेल बाँध सबसे बड़ा है । - गँगरेल सबले बड़का बाँध हे।
मैं हाँकी और क्रिकेट खेलता हूँ । - मैं हाकी अउ किरकेट खेलथौं ।
खाली पेट भजन नहीं होता । - भूखे भजन नइ होवै ।
आज 6 तारीख है । - आज छै तारीख हे ।
तुम साढ़े तीन बजे आए । - तैं साढ़े तीन बजे आए ।
दुकान 9 बजे खुलती है । - दुकान नौ बजे खुलथै ।
आँफ़िस 10 बजे खुलता है । - आफिस दस बजे खुलथे।
बाजार रात को बंद रहता है । - बजार रात के बंद रइथै ।
लड़के प्रतिदिन 1 घंटा खेलते हैं । - लइका मन रोज एक घंटा खेलथैं ।
पत्र तीन दिन में मिलेगा । - चिट्ठी तीन दिन मा मिलही ।
वह रायपुर में सन् 90 से है । - औ सन नब्बे ले रायपुरमा है ।
वह कब से आ रहा है । - वो कब ले आवत हे ।
कल मैं भोपाल जाऊँगा ।- मैं काली भोपाल जाहौं ।
मैं सुबह गाय चराने जाता हूँ । - मंय बिहनिया गरुवा चराए बर जाथौं ।
किसान दिन भर खेत में रहता है । - किसान दिन भर खेत मा रहिथै ।
मैं अगले महीने मिलूँगा । - मैं अबइया महीना म मिलिहौं ।
दीवाली कार्तिक में होती हैं । - देवारी कार्तीक म पाहोथै ।
वह अभी नहीं आई है । - ओ अभी नइ आए हे ।
शो 6 बजे शुरु होता है । -खेल छै बजे चालू होथै ।
रात भर पानी गिरा । - रात भर पानी गिरिस ।
लड़की स्कूल से अनुपस्थित थी । - छोकरी इस्कूल से बाहिर रहीस ।
मेरे पिताजी मेरे साथ थे । - मोर ददा मोर संग रहिस ।
मेरे पिताजी साथ थे । - मोर ददा मोर संग रहिस ।
मेरा अधिकारी मेहरबान है । - मोर साहब मोर उपर खुस हे ।
शीला बहरी है । - सीला भइरी आय ।
अंधा देख नहीं सकता । - अँधरा नइ देखे सकय ।
उसे आम बहुत भाते हैं । - ओला आमा नीक लागथै ।
ध्रूमपान मत करो । - चोंगी-माखुर झन पियौ ।
हम पर भरोसा कर सकते हैं । - हमर उपर भरोसा रख सकत हव ।
मैं जाने ही वाला था । - मैं जबइयाच रहैं ।
वर्फ सड़क पर फैली है । - बरफ रद्दा भर बगरे हे ।
वह मलेरिया से पीड़ित है । - ओ मलेरिया बुखार मा पर कल्हरथै ।
गरम पानी पीओ । - ताता पानी पियौ ।
वह पेट भर खाता है । - ओ हा पेट भर खाथै ।


कुछ अन्य वाक्यः

रात में कितनी ठंड थी । - रात म कतेक जाड़ रहिस ।
वे बहुत कष्ट पा रहे हैं । - ओ मन गजबे दुख भोगत हैं ।
गरीब का कोई नहीं । - गरीब के कउनो नइ ए ।
चुपचाप रहो । - कलेचुप रहौ ।
कृपया दरवाजा खोलें। - दरवाजा ल खोलौ तौ ।
एक गिलास दूध लीजिए । - एक गिलास दूध लेवौ ।
मैं स्टेशन पर पहुँचा नहीं था। - मैं स्टेशन हबरे नइ पाए रहें ।
और गाड़ी छूट गई। - अउ गाड़ी रेंग दिस ।
सबको एक दिन जाना है । - सबो ला एक दिन जाए बर हे ।
कोटबार मुनादी कर रहा है । - कोटबार हाँका पारत हे ।
रीता रमा से सुंदर है ।- सीता ह रमा ले सुग्घर हे ।
वह माँ-बाप की सेवा करता है । - ओ ह दाई-ददा के सेवा करथे ।
उसके दादा रोज खाने की चीज लाते हैं । - ओकर बबा रोज खजानी लाथै ।
काली गाय आ गयी । - कारी गइया आगय ।
ग्वाला दूध दूहता है । - राउत दूध दुहथै ।
भिंडी पकी है । - रमकेरिया चुरे है ।
वह मेरा दोस्त है । -ओ मोर संगी ए ।
वे कौन हैं ? - ओ मन कउन एँ हैं ?
वह कौन है ? - ओ ह कउन ए ?
वे मेरे मित्र है । - ओ मन मोर मितान एँ ।
वहाँ कौन है ? - ओ मेर कोन हे ?
वह कब आया ? - ओ कब आइस ?
राम कब जाएगा ? - राम कतका जुवार जाही ?
मैं हूँ न । - मैं हौं नां या मंय हंव ना ।
क्या मुझे बुला रहे हैं ? - का मोला बलावत हैं ?
आज खुशी का दिन है ।- आज खुसी के दिन हे ।
चार बजे हैं । - चार बजे हे ।
कक्षा में बहुत से लड़के हैं । - क्लास मा अड़बड़ झन लइका हैं ।
मजदूर काम कर रहे हैं । - बनिहार मन कमात हैं ।
मजदूरों को मज़दूरी मिल गई । - बनिहार मन ला रोजी मिलगे ।
पाँच किलो चावल खरीदना है ।- पाँच किलो चाँउर बिसाए बर हे ।
मेरी कमीज कफेद है । - मोर कुरता सफेद हे ।
सुंदर फूल खिले है । - सुग्घर फूल फूले हे ।
हाँ । - हौ या हव या हाँ ।
नहीं । - नइ ।
नहीं जानती । - नइ जानौं ।
कुछ भी नहीं है । - कुछु नइ ए ।
थोड़ा पानी दे। - थोकुन पानी हे या थोरकुन पानी दे ।
बहुत दूध है । - अब्बड़ दूध हे ।
मैंने पढ़ाई छोड़ दी । - मैं पढ़ाई छोड़ दें ।
वह रिटायर हो गया । - ओ रिटायर हो गै ।
पटवारी से नक्शा माँगो ।- पटवारी मेर नक्शा माँगौ ।
आज चुनाव है । - आज चुनई है ।
सोच –समझ के वोट देना । – ठोक- बजा के बोट डारबे ।
साहब सेशिकायत करो । - साहब मेर रिपोट करौ ।
पंप बिगड़ गया है । - बोरिंग बिगड़ गै है ।
पानी को गंदा मत करो । - पानी ला झन मतला।
सड़क-गली को साफ रखें । - खोर-गली ला साफ रखौ ।
आज पंथी नाच देखने जाएँगे । - आज पंथी नाचा देखे बर जाबो ।
सब्जी बहुत मँहगी है । - साग बड़ मँहगी है ।

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आज के लिए बस इतना, कल फिर सीखेंगे ।

(आज बर एतका, काली फेर सीखबोन)
जाते-जाते एक छत्तीसगढ़ी कविता तो सुनते चलें ।
( जात-जात एक ठिन छत्तीसगढ़ी कविता सुनत चलीं )

रतिहा के फूल

दूरिहा ले
टेसू कस दमकत रहय
तीर ले
निकरय तव
गुलाब कस गमक जाय
चंपा
चमेली
रातरानी
खोखमा
मोंगरा कस
रोज फूलय
परिजात कस
अधरतिहा ले झरत रहय
अब परे हवय
एक कोन्टा म
खोपा के बसियाय फूल कस
अही गति होथे
रतिहा फुलइया फूलन के

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रात का फूल

दूर से ही टेसू-सी दमकती रहती
किनारे से
गुजरती तो
गुलाब-सी गमक उठती
चंपा
चमेली
रातरानी
कमल
मोंगरे –सी रोज खिलती
पारिजात-सी
आधीरात तक झरती रहती
अब एक कोने में पड़ी हुई है
जूड़े के बासी फूल –सी
यही गति होती है
रात को फूलने वालों फूलों की

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मूल रचनाः श्री रसिक बिहारी अवधिया
अनुवादः जयप्रकाश मानस

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3 Comments:

At 8:01 PM, Blogger Udan Tashtari said...

बहुत अच्छी कक्षा लगी हुई है, जारी रखें.कविता दोनों भाषा मे पसंद आई.:)
बधाई,
समीर लाल

 
At 2:28 AM, Blogger Nishikant Tiwari said...

लहर नई है अब सागर में
रोमांच नया हर एक पहर में
पहुँचाएंगे घर घर में
दुनिया के हर गली शहर में
देना है हिन्दी को नई पहचान
जो भी पढ़े यही कहे
भारत देश महान भारत देश महान ।
NishikantWorld

 
At 12:58 AM, Blogger समीर सिंह चौहन said...

बहुत बढ़िया प्रयास है। बधा‌ई!
आगे भी नवीन जान्कारीयो से अनुग्र्हीत करे

 

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