tag:blogger.com,1999:blog-23831681.post-1142707050611286332006-03-18T10:27:00.000-08:002006-03-18T10:45:21.820-08:00छत्तीसगढ़ी बोलना कैसे सीखें (दूसरा दिन)<span style="font-size:130%;color:#ff6600;"><strong>छत्तीसगढ़ी बोलना कैसे सीखें ?</strong></span><br /><strong><span style="font-size:130%;color:#ff6600;"></span></strong><br /><span style="color:#009900;"><strong>दूसरा दिन </strong></span><br /><span style="color:#009900;"><strong>(क्रमशः)</strong></span><br /><br /><span style="color:#ff6600;">हिन्दी - छत्तीसगढ़ी</span><br /><br /><span style="color:#3333ff;"><span style="color:#ff6600;"><strong>शिष्टाचार के कुछ वाक्यः</strong></span><br /><br />ठीक समय पर नहीं आ सका, माफ करें - टेम मा नई आए पाएँ, माफी देहौ<br />माफ कीजिए, मुझे छोड़ी-सी देर हो गई - देरी हो गै, माफी देहौ<br />गलती हो गई, मुझे दुःख है - गलती हो गै (चूक हो गै) मोला दुख हे<br />मुझे क्षमा करें - मोला छिमा करौ<br />ग़लती से हो गया,अब आगे ऐसा नहीं होगा- अउ आगू अब गलती नइ होवै, माफी देहौ<br />कुछ कहना (बताना) चाहता हूँ, मौका दें - कुछु कहे-बताए बर है, मौका दौ<br />ज़रा ध्यान दें, जरा सुनें, ज़रा बोलने दें - थोकुन ध्यान देहौ,सुनौ तो, बोलन दौ<br />जरा आगे आएँ या बढ़े, छोड़ा चुप रहें - थोकुन आगू बढ़ौ, रैगौ,<br />जोर से न बोलें - निरया के झन बोलौ या बोलव<br />इसे अपना ही समझें – येला अपनेच समझव<br />अपना समझकर उपयोग करें– तुम्हरे च तो आए, अपनेच समझौ अउ बउरौ<br />क्या मैं अंदर आ सकता हूँ - मैं भीतरी म आवंव<br />क्या मुझे बैठने दैंगे ? – मैं बैठौं या मोला बइठे बर देहू<br />क्या मैं बाहर जा सकता हूँ – मैं बाहिर जावौं या मैं बाहिर जावंव का<br />मैं यही बैठता हूँ – मैं येहींच (इहेंच) बइठथौं<br />मैं यहाँ खड़ा हूँ - ऐ मेर मंय ठाढ़े हौं<br />मैं छोड़ी देर रुकता हूँ – मैं थोरकुन ठहरत हौं<br />वह थोड़ी देर रुक गया – ओ ह थोरकुन बिलम गीस<br />थोड़ी देर बाद आऊँगा, जाऊँगा, खाऊँगा - मैं थोकुन बिलम के आहौं जाहौं, खाहौं<br />जैसी आपकी मर्जी – जइसे तुँहर इच्छा<br />आराम से बैठिए - बने बइठौ न जी<br />जल्दी-जल्दी मत कर -,सुसता लौ, लकर-लकर झन करौ<br />आपसे सलाह के लिए धन्यवाद – मिल के बने लागिस, बने बतायौ जी </span><br /><span style="color:#3333ff;">पूरी कोशिश करूँगा / करूँगी - मैं अपने डाहर ले जम्मो उदिम करिहौं<br />आप ठीक हैं न – तूँ सुग्धर हौ न या तूँ नित्ता तो हौ<br />भगवान आपका भला करे - भगवान तुँहर भला करै<br />क्षमा करना, क्षमा माँगता हूँ -माफी देहौ, माफी माँगत हौ<br />ग़लती हो गई - गलती होगै, चूक होगै<br />मुझे खेद है (दुःख है) – मोला दुःख हे<br />साफ़-साफ़ बोलें, जोर से बोले, स्पष्ट कहों - बने फरी-फरी या सफ्फा गोठियावौ<br />साहब आ गए, आए हैं, - साहेब आइस हे, आए हैं, आइन हैं आगे<br />साहब न कहा है, बाबू ने बताया है – साहेब कहिस है, बाबू बताइस है<br />साहब बुला रहे हैं, चपरासी को बुलाओ - साहब बलावत है, चपरासी ला बला<br />सुनो, पानी ले कर आऔ, साहब ने कहा है - सुन, पानी लान, साहब कहिस है<br />फाइल लाओ, पेन में स्याही नहीं है -फाइल ल लान, पेन मा सियाही नइ ए<br />मैं कब से घंटी बजा रहा हूँ - कतेक बेर ले घंटी बजावत हौं<br />टेलिफोन बज रहा, उठाओ - बड़े साहेब आए है, टेलिफोन बाजत है, उठा<br />बड़ी गर्मी है – अड़बड़ गरमत हे<br />ठंड लग रही है या पानी गिर रहा है -जाड़ लागत है /पानी गीरत है<br /><br /><span style="color:#ff6600;"><strong>भावबोधक-शब्द एवं कथनः</strong></span><br /><br />वाह-वा- वाह-वाह - बने हस बाबू, वाह कमाल कर देस गा<br />जीतने वालों को शाबाशी दो –जितइया ला सबासी दे न गा<br />वाह, अहो, कितना सुंदर है –वाह, कतेक सुग्घर हे, बड़ सुग्घर है गा<br />ओ हो, इतना बड़ा – ओ हो, कतेक बड़ है गा, अरे ददा, कतेक बड़<br />तुमने तो कमान कर दिया –तैं तो कमाल कर दे<br />ईश्वर कृपा करें – भगवान तोर बढ़ोतरी करै, भगवान तोर भला करै<br />भगवान तुम्हारी उन्नति करें - भगवान तोर बढ़ोतरी करै, भगवान तोर भला करै<br />तुमको भी, आपको भी - तहूँ ला, तुहींच ला<br />बहुत बढ़िया – अड़बड़सुग्घर, बहुत बढ़िया<br />बड़ी खुशी का समाचार है – अघात(अड़बड़) खुसी के खबर समाचार है<br />प्रभु मेरे, दया कर –हे भगवान, दया करबे<br />आपका स्वागत है - तुँहर स्वागत हे<br />फटाफट काम करो - लहुआ-लङुआ कमा बाबू<br />वह जल्दी-जल्दी चलता है - ओह लकर-लकर रेंगथै<br />जल्दी करो भैया - लहुआ कर भैइया<br />चुप रहिए, हल्ला मत कीजिए – कलेचुप रहौ जी, हल्ला झन करौ ।<br />सच /सत्य बोलो - सत्बोलौ, सच बोलौ<br />झूठ मत बोरो - लबारी झन मारौ<br />धन्यवाद भाई - धन्यवाद भइया<br />बार-बार मत खाओ -घेरी-बेरी झन खाऔ<br />बधाई है आपको - तुँहला बदाई है<br />कितनीदुःखद बात है -अड़बड़ दुख के बात है<br />शर्म करो / शर्म नहीं है - शरप कर / तोला लाज नई लागै<br />आप जो चाहें - जइसे तुँहर मन / मरजी<br />छिः यह क्या है ? – छि (हाय) एहा काए दाई (ददा) ?</span><br /><span style="color:#3333ff;"><br /><strong><span style="color:#ff6600;">छोटे वाक्यांशः</span></strong><br /><strong><span style="color:#ff6600;"></span></strong><br />मैं अभी जा रहा हूँ - मैं हा जावत हौं<br />हम तजा रहे हैं - हमन जावत हन<br />वे जा रहे हैं -ओ मन जावत हैं<br />बच्चे खेल रहे हैं - लइका मन खेलत हैं<br />लड़कियाँ पढ़ रही हैं - नोनी मन पढ़त हें<br />बहुत अच्छा - बने हे गा<br />बस, रहने दो - भइगे, रहन दै<br />क्यों नहीं ?- काबर नइ ?<br />कब आएगा ? - कतका जुवार आही ?<br />थोड़ा –सा भी नहीं ?-छोरकुन घलो नइ ?<br />कल मिलेंगे - काली मिलबो या काली मिलबोन<br />परसों आएँगे - परने दीन आबो ।<br />बहुत दिने से नहीं देखा - अड़बड़दिन ले नइ देखेहौं<br />अच्छा, चलते हैं - अच्छा, जात हन चलत हन<br />आइए - आवौ या आवव<br />बैठिए - बइठौ या बइठव<br />बाहर इंतजार करो - बाहिर अगोर<br />सीधे जाओ - सोझ जा<br />***************<br /><br />आज बर एतका (आज के लिए इतना)<br /><br />काली फेर नवा-नवा बात जानबोन (कल नई-नई बात जानेंगे)<br /><br />जात-जात मोला एक ठिन छत्तीसगढ़ी गीत सुरता आगे (जाते-जाते मुझे एक छत्तीसगढी गीत याद आ गया है)<br /><br />चली, वोही ला जुरमिल के गायीं (चलिए, उसे सम्मिलित स्वर में गाते हैं)<br /><br />मैं बताना चाहूँ वो ह छ.ग. के बड़े गीतकार लक्ष्मण मस्तुरिहा के परसिद्ध गीत आय (मैं बताना चाहूँगा कि वह छत्तीसगढ़ के बड़े प्रसिद्ध गीतकार लक्ष्मण मस्तुरिहा जी का गीत है)<br /><span style="color:#cc33cc;">गीतः<br /></span><span style="color:#339999;">मोर संग चलव रे, मोर संग चलव जी<br />वो गिरे थके हपटे मन<br />अउ परे डरे मनखे मन<br />मोर संग चलव रे, मोर संग चलव जी<br /><br />अमरइया कस जुड़ छाँव में<br />मोर संग बइठ जुड़ालव<br />पानी पी लव मैं सागर अंव<br />दुख पीरा बिसरालव<br />नवा जोत लव नवा गाँव बर, रस्ता नवा गढ़व रे<br /></span><br />(मित्रो, यह उनका ऐसा गीत है जिसे सभी छत्तीसगढिया गाते-गुनगुनाते हैं । यह इतना प्रसिद्ध गीत है कि इसे विश्व के कई देशों के रेडियोवाले बजा चुके हैं )<br /><br /><span style="color:#333300;">मित्रो, अब चलते हैं । मेरी पत्नी पूछ रही थी कि इस पाठ से तुम्हें क्या मिलेगा ? क्या आप भी ऐसा समझते हैं कि आत्मसंतोष नहीं मिलेगा मुझे । नहीं ना । तो मैं कल्पना जी से कह देता हूँ कि आप लोग इसका लाभ उठा रहे हैं । हाथ कंगन को आरसी क्या । पढ़े लिखे को फारसी क्या । चलिए, उसके संतोष के लिए एक पत्र ही लिख दीजिए हमें । तो वह भी तल्लीनता के साथ इसे पोस्ट करने में सहयोग किया करेगी ।<br />पत्र की प्रतीक्षा में । हाँ वही- ई-मेल भाई..........<br /></span><span style="color:#003300;"><br />राम-राम भइया मन ।</span> </span><br /></span>छत्तीसगढ़http://www.blogger.com/profile/04319601357898309236noreply@blogger.com